मोतिहारी (पूर्वी चंपारण): बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज प्रखंड स्थित गुरहां गांव इन दिनों भक्ति और शक्ति के अनूठे संगम का केंद्र बना हुआ है। यहाँ आयोजित नौ दिवसीय श्री चंडी महायज्ञ ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में सराबोर कर दिया है। सुबह की मंगल आरती से लेकर देर रात तक होने वाले भजनों और रामलीला के कार्यक्रमों ने स्थानीय लोगों के बीच सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है।
सोमेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में भव्य आयोजन
इस महायज्ञ का आयोजन प्रसिद्ध सोमेश्वरनाथ महादेव मंदिर के प्रांगण में किया जा रहा है। कार्यक्रम के आठवें दिन विशेष भव्यता देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत सोमेश्वरनाथ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी रविशंकर गिरी और पूर्व विधायक राजन तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर की।
इस अवसर पर स्वामी रविशंकर गिरी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए चंडी महायज्ञ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह यज्ञ मार्कंडेय पुराण और दुर्गा सप्तशती पर आधारित है, जिसमें माँ भगवती के तीन रूपों— महाकाली (साहस), महालक्ष्मी (समृद्धि) और महासरस्वती (ज्ञान) की उपासना की जाती है। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण जीवन में ऐसे धार्मिक आयोजन मानसिक शांति और सामाजिक सद्भाव का सबसे बड़ा स्रोत हैं।
जीवंत रामलीला: सीता हरण के दृश्य ने किया भावविभोर
महायज्ञ के मुख्य आकर्षणों में स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जा रही रामलीला रही। आठवें दिन ‘सीता हरण’ और ‘जटायु वध’ के मार्मिक प्रसंगों का मंचन किया गया।
- स्वर्ण मृग प्रसंग: कलाकारों ने सोने के हिरण के पीछे श्री राम के जाने के दृश्य को बेहद खूबसूरती से दर्शाया।
- मार्मिक मंचन: रावण द्वारा साधु वेश में माता सीता का हरण और जटायु द्वारा उन्हें बचाने के लिए प्राणों की आहुति देने के दृश्य को देखकर पंडाल में मौजूद हजारों महिलाओं और बच्चों की आँखें नम हो गईं।
- प्रेरणादायक संदेश: जटायु के संघर्ष के माध्यम से दर्शकों को अधर्म के विरुद्ध खड़े होने का संदेश दिया गया।
सामाजिक एकता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इस धार्मिक उत्सव ने न केवल आस्था को बढ़ावा दिया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और एकता को भी मजबूती दी है। नगर अध्यक्ष रन्टु पांडेय ने बताया कि यह आयोजन पूरे गांव को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष राजू कुमार मिश्रा मुस्तैद दिखे, वहीं मुखिया रामबाबू मिश्रा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने आयोजन की सफलता में सक्रिय भूमिका निभाई।
कल होगा महायज्ञ का भव्य समापन
नौ दिनों तक चले इस भक्तिमय सफर का कल अंतिम दिन है। आयोजकों के अनुसार, समापन के अवसर पर विशाल कलश यात्रा और पंचाग्नि हवन का आयोजन किया जाएगा। इसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि पर्यावरण की शुद्धि और सामाजिक समरसता भी बढ़ती है।
रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, मोतिहारी (बिहार)






