बिहार के मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) जिले के अरेराज अनुमंडल में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता पहुँचाना और कानूनी कार्यवाही में तेजी लाना था।
प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक
अरेराज अनुमंडल कार्यालय में आयोजित इस अनुमंडल स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) सुश्री अंजली शर्मा और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) श्री रवि कुमार ने संयुक्त रूप से की। बैठक में क्षेत्र के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), प्रखंड कल्याण पदाधिकारी और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
मुआवजे की प्रक्रिया पर विशेष जोर
बैठक के दौरान अधिकारियों ने एससी-एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली सहायता राशि की समीक्षा की।
- प्रथम किस्त: बैठक में बताया गया कि दर्ज कांडों में मुआवजे की पहली किस्त के भुगतान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा चुका है।
- द्वितीय किस्त: दूसरी किस्त मिलने में होने वाली देरी को कम करने पर विस्तार से चर्चा हुई। नियमानुसार, दूसरी किस्त का भुगतान चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल होने के बाद होता है।
पुलिस को 60 दिनों के भीतर चार्जशीट का निर्देश
कानूनी प्रक्रिया को गति देने के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) ने स्पष्ट निर्देश दिए कि:
- संबंधित मामलों में 60 दिनों के भीतर हर हाल में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया जाए।
- लंबित मामलों का निष्पादन जल्द से जल्द किया जाए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
- जाँच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और त्वरित हो, जिससे समाज के कमजोर वर्गों का कानून पर भरोसा बना रहे।
जनकल्याण और सुरक्षा का आश्वासन
प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया गया कि अनुसूचित जाति और जनजाति से संबंधित किसी भी मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कल्याण पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे पुलिस विभाग के साथ समन्वय बनाकर कागजी कार्रवाई पूरी करें ताकि लाभार्थियों के बैंक खातों में समय पर सहायता राशि भेजी जा सके।
अमरजीत सिंह की रिपोर्ट, मोतिहारी






