बिहार के मुंगेर जिले में स्थित आईटीसी फैक्ट्री के मजदूरों में इन दिनों भारी असंतोष व्याप्त है। इसकी वजह है टीएम वर्कर्स यूनियन का बीते 14 साल से चुनाव न होना। नियमतः हर तीन साल में चुनाव होना अनिवार्य है, मगर लंबे समय से चली आ रही इस अनदेखी के कारण मजदूरों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
इसी गुस्से का इज़हार आज मुंगेर की सड़कों पर देखने को मिला, जब सैकड़ों मजदूरों ने आईटीसी प्रबंधन और वर्तमान यूनियन अध्यक्ष के खिलाफ एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला। हाथ में तख्तियां और बैनर लिए मजदूरों ने ज़ोरदार नारेबाजी की और तत्काल चुनाव कराने की मांग की।
ठप यूनियन चुनाव: क्या है विवाद की जड़?
यह पूरा मामला आईटीसी की मुंगेर फैक्ट्री की टीएम वर्कर्स यूनियन से जुड़ा है। यूनियन का आखिरी चुनाव साल 2011 में हुआ था। 14 साल बीत जाने के बावजूद चुनाव न होने से मजदूरों का मानना है कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।
मजदूरों का सीधा आरोप है कि वर्तमान यूनियन अध्यक्ष, जो कि बाहरी व्यक्ति हैं, वह प्रबंधन की गोद में बैठकर मजदूरों का शोषण कर रहे हैं। वे कर्मचारियों को मिलने वाली आवश्यक सुविधाओं और उनके अधिकारों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
एलटीए और एग्रीमेंट बने तत्काल गुस्सा भड़कने का कारण
मजदूरों का गुस्सा हाल के दिनों में तब और ज़्यादा भड़का, जब लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) और नए एग्रीमेंट का समय आ गया। कंपनी ने साफ संकेत दिया है कि अगर यूनियन का चुनाव नहीं होगा, तो एलटीए भी नहीं मिलेगा।
मजदूरों का कहना है कि एलटीए और एग्रीमेंट जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं से उन्हें वंचित रखना सरासर अन्याय है। एक चुनी हुई प्रतिनिधि यूनियन के बिना वे कंपनी के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करने में सक्षम नहीं हैं। यही कारण है कि अब मजदूरों ने संघर्ष का रास्ता चुना है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे भूख हड़ताल, अनशन और धरना-प्रदर्शन जैसे कठोर कदम भी उठाएंगे।
आक्रोश मार्च: वासुदेवपुर से शास्त्री चौक तक गूंजी आवाज़
यह आक्रोश मार्च मुंगेर के वासुदेवपुर स्थित आईटीसी यूनियन कार्यालय से शुरू हुआ। मार्च में शामिल सैकड़ों मजदूरों ने “चुनाव कराओ, अधिकार बचाओ” जैसे नारे लिखे बैनर और तख्तियां ले रखी थीं। शहर के मुख्य चौक-चौराहों से गुज़रते हुए यह काफिला अंत में शास्त्री चौक पर आकर समाप्त हुआ।
मार्च का नेतृत्व मजदूर नेता जयराज गौतम ने किया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए वर्तमान अध्यक्ष पर आरोप लगाया कि वह प्रबंधन के इशारे पर काम कर रहे हैं और मजदूरों की समस्याओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले 12 सितंबर को चुनाव कराने की पूरी तैयारी थी, मगर एक साजिश के तहत इसे फिर से रद्द कर दिया गया।
मजदूर नेता जयराज गौतम का कड़ा बयान
जयराज गौतम ने 14 साल के इस लंबे अंतराल को “शोषण का चरम” बताया। उन्होंने कहा, “हमारा कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन 14 साल बीत चुके हैं। अब जब एलटीए और एग्रीमेंट का समय आया है, तो कंपनी कह रही है कि चुनाव नहीं होगा, तो एलटीए भी नहीं मिलेगा। यह हमारे साथ घोर अन्याय है।”
गौतम ने स्पष्ट किया कि मजदूरों के अधिकारों की यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक वर्तमान अध्यक्ष की मजदूर-विरोधी नीतियां खत्म नहीं हो जातीं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अपनी बात बता दी है और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन मिला है।
भविष्य की रणनीति: संघर्ष ही एकमात्र रास्ता
जब उनसे पूछा गया कि अगर आईटीसी प्रबंधन उनकी बात नहीं मानता है, तो उनका अगला कदम क्या होगा, तो जयराज गौतम ने दृढ़ता से कहा, “हम संघर्ष करेंगे। हम धरना-प्रदर्शन, अनशन, और भूख हड़ताल भी करेंगे। अगर हमारी बात नहीं मानी गई, तो हम कानूनी और संघर्ष की सभी प्रक्रियाएं अपनाएंगे।”
उन्होंने इस आक्रोश मार्च में सैकड़ों मजदूरों की भागीदारी को “गुस्से का चरम” बताया और चेतावनी दी कि यह महज एक चेतावनी है। यदि जल्द ही कोई निर्णायक फैसला नहीं लिया गया, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
मौजूदा स्थिति और आगे की राह
वर्तमान में, आईटीसी प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मजदूर तत्काल चुनाव कराने की अपनी मांग पर अडिग हैं, जिसे वे अपने अधिकारों और भविष्य का सवाल मान रहे हैं। यूनियन अध्यक्ष ने भी इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।
यह देखना बाकी है कि क्या संबंधित सरकारी विभाग इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करते हैं और मजदूरों की लोकतांत्रिक मांग को पूरा करने के लिए कोई कदम उठाते हैं। फिलहाल, मुंगेर में आईटीसी मजदूरों का गुस्सा और उनकी मांग, दोनों ही ज़ोरों पर हैं और चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।








