साल 2025 में कुल चार ग्रहण होने हैं, जिनमें से तीन पहले ही लग चुके हैं। अब बारी है साल के आखिरी सूर्य ग्रहण की, जिसका ज्योतिष और धार्मिक दृष्टिकोण से अपना खास महत्व है। इस बार की खास बात यह है कि यह ग्रहण आश्विन महीने की अमावस्या पर पड़ रहा है, जिस दिन सर्वपित्री अमावस्या भी है।
ऐसे में हर कोई यह जानना चाहता है कि यह सूर्य ग्रहण कब लगेगा और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सूर्य ग्रहण कब लगेगा और समय
इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर, रविवार को लगेगा।
- समय: भारतीय समयानुसार यह ग्रहण रात 10:59 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 3:22 बजे तक रहेगा।
भारत में दृश्यता:
- चूंकि ग्रहण के समय भारत में रात हो चुकी होगी, इसलिए यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
- हालांकि, विदेशों में यह ग्रहण देखा जा सकेगा। प्रमुख दर्शनीय क्षेत्र हैं: न्यूजीलैंड, फिजी, ऑस्ट्रेलिया का दक्षिणी भाग, और अंटार्कटिका।
ज्योतिष शास्त्र में स्पष्ट कहा गया है कि ग्रहण का सूतक काल और प्रभाव केवल उसी क्षेत्र में मान्य होता है, जहां वह दिखाई देता है।
सूर्य ग्रहण का सूतक काल
सूर्य ग्रहण के पहले सूतक काल शुरू होता है, जो ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले प्रारंभ होता है।
- सूतक काल का समय: इस बार सूतक काल भारतीय समयानुसार सुबह 11:00 बजे से शुरू होगा और अगले दिन सुबह 3:22 बजे तक रहेगा।
सूतक काल के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा अधिक होने की मान्यता है, इसलिए कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है:
- ग्रहण या सूतक काल के दौरान नया खाना न बनाएं।
- मंदिर में प्रवेश या प्रतिमाओं को छूना वर्जित है।
- खाने-पीने की चीज़ों में कुशा या तुलसी के पत्ते डालकर ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सतर्क रहने को कहा जाता है। माना जाता है कि सूर्य की डायरेक्ट किरणें शिशु पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
क्या करें:
- ग्रहण और सूतक काल में कुछ भी खाने-पीने से बचें।
- इष्ट देवताओं के मंत्रों का जाप करें।
- बाहर निकलना पड़े तो पूरा कपड़ा पहनें और चश्मा लगाएं।
मेरी एक दोस्त की दादी हमेशा कहती थीं, “ग्रहण में सूरज की ओर आंखें मत डालना, बच्चों पर असर पड़ सकता है।” ऐसे छोटे अनुभव हमें सावधानी रखने की याद दिलाते हैं।
सूर्य ग्रहण और पूजा-पाठ
सर्वपित्री अमावस्या के साथ पड़ने के कारण यह दिन पितरों के तर्पण और विदाई जैसे धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
धार्मिक सुझाव:
- ग्रहण या सूतक काल में शुभ यात्रा या पूजा टालें।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और जल अर्पण अवश्य करें।
धार्मिक अनुभव बताते हैं कि ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन मिलता है।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें
सूर्य ग्रहण के समय कुछ नियमों का पालन करना लाभकारी माना जाता है।
व्यक्तिगत अनुभव बताते हैं कि मैंने एक बार सूर्य ग्रहण के दौरान सूरज की रोशनी में आंखें डाल ली थीं। आंखों में झिलमिलाहट हुई और तुरंत समझ आया कि सावधानी कितनी जरूरी है।
संक्षिप्त टिप्स
तो अगर आप पूछ रहे हैं कि सूर्य ग्रहण कब लगेगा, तो जवाब है: 21 सितंबर 2025, रात 10:59 बजे से अगले दिन सुबह 3:22 बजे तक।
कुछ बातें याद रखें:
- ग्रहण के दौरान सावधानी और संयम बरतें।
- गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान दें।
- मंत्र जाप, पूजा और शुद्धिकरण ग्रहण समाप्ति के बाद ही करें।
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, “सूतक काल में वातावरण संवेदनशील रहता है। छोटी-छोटी सावधानियों से ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।”








