आप जानते हैं, कुछ ख़बरें ऐसी होती हैं जो सीधा दिल पर वार करती हैं। आप बस ठहर जाते हैं, सांस अटक जाती है, और आप अंदर ही अंदर प्रार्थना करते हैं कि काश ये झूठ हो। आज ऐसी ही एक ख़बर आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, ख़ासकर हमारे असम को।
जिस आवाज़ ने “या अली” गाकर करोड़ों दिलों को प्रेम और पीर से भर दिया था, जिस रॉकस्टार को असम अपनी पहचान मानता था—वह जुबिन गर्ग अब हमारे बीच नहीं रहे। हां, यह भयानक सच है। जुबिन दा चले गए।
ख़बर सुनते ही मैं अवाक रह गया। विश्वास नहीं हुआ। लगा कोई ग़लत अफ़वाह होगी। पर जैसे-जैसे न्यूज़ चैनल्स पर ये चलने लगा, दिल बैठता चला गया। सिर्फ़ फ़ैन्स नहीं, पूरा संगीत जगत और असम की आत्मा आज शोक में डूब गई है।
एडवेंचर, जो मौत बन गया
यह सवाल हर किसी के ज़ेहन में है—आख़िर हुआ क्या? जुबिन गर्ग सिंगापुर में थे। नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में उन्होंने अपना जलवा बिखेरा था, जैसा कि वह हमेशा करते थे—स्टेज पर उनकी ऊर्जा, उनका पागलपन, और उनकी आवाज़—सब मिलाकर एक जादुई माहौल बना देते थे।
परफॉर्मेंस के बाद, शायद उन्हें लगा कि क्यों न थोड़े पल ख़ुद के लिए जिए जाएं, कुछ एडवेंचर किया जाए। उन्होंने स्कूबा डाइविंग का फ़ैसला किया। समुद्र की गहराई हमेशा से ख़ूबसूरत और रहस्यमयी रही है, पर उतनी ही ख़तरनाक भी।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि पानी में जाते ही उन्हें गंभीर सांस लेने की दिक़्क़त हुई। यह शायद पानी के बढ़ते दबाव का असर था। अंदरूनी चोटें भी आईं। वह भयावह पल, जब ख़ुशी का एडवेंचर अचानक मौत के साए में बदल गया। उन्हें तुरंत पानी से बाहर निकाला गया, और सीपीआर भी दी गई। लेकिन, शायद नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।
सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल के आईसीयू में डॉक्टरों ने जी-जान लगा दी। एक कलाकार को बचाने की हर संभव कोशिश हुई, लेकिन ज़िंदगी की डोर टूट गई।
असम रो पड़ा, देश स्तब्ध
जैसे ही ये दिल दहला देने वाली ख़बर गुवाहाटी पहुँची, पूरा असम थम गया। सड़कों पर सन्नाटा छा गया, पर उनके घर के बाहर हज़ारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर चेहरे पर एक ही भाव था—अविश्वास और गहरा दुःख। बूढ़े, जवान, बच्चे… सब रो रहे थे। किसी के मुंह से निकल रहा था, “हमारा जुबिन दा… हमारा गौरव चला गया।” यह सिर्फ एक गायक का जाना नहीं था, यह असम की भावना का जाना था।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने दुःख को शब्दों में बयां किया: “जुबिन दा की आवाज़ हमेशा हमारी सांस्कृतिक विरासत में गूंजती रहेगी। हमने सिर्फ़ एक गायक नहीं, बल्कि असम की पहचान का एक अहम हिस्सा खो दिया है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्वीट भी आया: “भारत ने आज एक अनमोल रत्न खो दिया है। जुबिन गर्ग की मखमली आवाज़ हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।”
वह सिर्फ़ गायक नहीं थे, वह एक ज़ुड़ाव थे
हम जुबिन गर्ग को सिर्फ़ एक गायक की तरह याद करते हैं, पर वह इससे कहीं ज़्यादा थे। वह एक संपूर्ण कलाकार थे—संगीतकार, अभिनेता, और सबसे बड़ी बात, एक सच्चे इंसान।
क्या आप जानते हैं? उन्होंने 30 से ज़्यादा भाषाओं में गाया है! जी हां, 30 से ज़्यादा! हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, मराठी… और यकीनन, उनकी प्यारी असमिया।
लेकिन वह गीत जिसने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई, वह था “या अली”। आज भी जब यह गाना बजता है, तो लगता है कि कोई जादू चल रहा है।
उनके क़रीबी दोस्त बताते हैं, “जुबिन ज़मीन से जुड़े इंसान थे। वह कहते थे कि मुझे बड़ा स्टार नहीं बनना, मुझे लोगों के बीच रहना है। मैं तो फ़ुटपाथ का आदमी हूं।” इस प्रसिद्धि के बावजूद अपनी जड़ों से उनका यह ज़ुड़ाव ही उन्हें सबसे ख़ास बनाता था।
सोशल मीडिया पर उमड़ता सैलाब
आज सोशल मीडिया पर देखिए, सब जगह सिर्फ़ आंसू हैं, दर्द है। “हमारा हीरो चला गया,” लाखों लोग लिख रहे हैं। “भूपेन दा के बाद अब जुबिन दा… ये खालीपन कौन भरेगा?” ये सवाल हर असमिया के होंठों पर है।
उनके पुराने वीडियोज़, लाइव परफॉरमेंस के क्लिप्स… हर जगह उनकी यादें गूंज रही हैं। यह दिखाता है कि एक कलाकार अपनी कला से लोगों के जीवन में कितनी गहराई से उतर जाता है।
एक युग का अवसान
हाँ, संगीत का सफ़र कभी नहीं रुकता। लेकिन कुछ कलाकारों के जाने से एक पूरा युग समाप्त हो जाता है। जुबिन गर्ग का जाना संगीत जगत के लिए एक बड़ा झटका है।
मगर याद रखिए—कलाकार कभी नहीं मरते।
आज जुबिन दा हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी आवाज़, उनकी धुनें, उनका हर सुर, हमारे दिलों में अमर है। जब भी “या अली” बजेगा, जब भी उनके असमिया लोकगीत गूंजेंगे… हमें लगेगा जैसे जुबिन दा यहीं हैं, मुस्कुरा रहे हैं।
अलविदा जुबिन दा… आपकी आवाज़ को हमारी अंतिम श्रद्धांजलि।
आपसे एक सवाल:
जुबिन गर्ग का कौन सा गाना आपके दिल को छूता है? उस गाने का नाम कमेंट में ज़रूर साझा करें।












