मुंबई: बॉलीवुड की दुनिया हमेशा से ही अपने ग्लैमर, ड्रामा, और अनएक्सेप्टेड ट्विस्ट्स के लिए जानी जाती रही है। और इस बार तो इंडस्ट्री में एक ज़बरदस्त नया शोर मच चुका है! ऐसा लग रहा है कि शाहरुख़ ख़ान के बेटे के डेब्यू के साथ, बॉलीवुड के नए चमत्कार का आगाज़ हो गया है। सच कहूं तो, फ़िल्म इंडस्ट्री में लंबे समय बाद कुछ ऐसा देखने को मिला है जो लोगों की उम्मीदों से परे है—यह सिर्फ़ एक डेब्यू नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक चर्चा का विषय बन गया है।
“द बास्टर्ड्स ऑफ बॉलीवुड”: 5 घंटे का सफ़र और दिल की गहराई!
हाल ही में रिलीज़ हुई सीरीज़ “द बास्टर्ड्स ऑफ बॉलीवुड” ने सिर्फ़ 5 घंटों में दर्शकों को पूरी दुनिया की सैर करा दी है। यह कोई साधारण फ़िल्म नहीं, बल्कि सात एपिसोड की एक गहन सीरीज़ है। इसे देखते हुए आपको हर एपिसोड के बाद सोचना पड़ेगा: “वाह! बॉलीवुड की दुनिया इतनी गहरी और जटिल हो सकती है?” इसने वाकई बॉलीवुड की असलियत को पर्दे पर लाने की हिम्मत दिखाई है।
जूनियर शाहरुख़: नया अंदाज़ या पुराने अंदाज़ की कॉपी?
शायद सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस सीरीज़ में कहीं न कहीं शाहरुख़ ख़ान को “घंटे का बादशाह” भी कहा गया है। और बस यहीं से शुरू होती है जूनियर शाहरुख़ की कहानी, जिसने सेलेब्रिटीज़ के साथ अपनी छवि बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मौके पर मौजूद कई लोगों (यानी, दर्शकों) के मुताबिक, इस युवा स्टार का अंदाज़ काफ़ी नया और फ़्रेश लगा। यह पुराने अंदाज़ की कार्बन कॉपी नहीं है, बल्कि एक नई पीढ़ी की झलक है।
इसी बीच, इमरान हाशमी का कैमियो भी दर्शकों के लिए एक मीठा सरप्राइज़ साबित हुआ। “दुनिया हसीनों का मेला” गाने में इमरान हाशमी की एंट्री को क्रिएटिव और यादगार कहना ही पड़ेगा।
कैमियो स्टार्स और उनकी धमाकेदार एंट्री
शो में आमिर ख़ान, सलमान ख़ान, राजामौली जैसे बड़े नामों का भी ज़िक्र है। लेकिन व्यक्तिगत रूप से, मुझे लगता है कि पिछले पांच सालों में बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली कैमियो के रूप में इमरान हाशमी का नाम लेना बिलकुल सही होगा।
एक और बात जो मुझे खटकी: शो में तमन्ना का गाना दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है—लोग पूछ रहे हैं कि यह गाना क्यों नहीं दिखाया गया? फिलहाल, इस सवाल का जवाब शायद शो की अंदरूनी कहानी में ही कहीं छुपा हुआ है।
नेपोटिज़्म, रियलिटी और आर्यन ख़ान का ‘गट्स’
शो का टाइटल ही संकेत देता है कि यह कहानी बॉलीवुड और नए हीरो की है। नाम है “रिवॉल्वर डिशो”, जो पहली फ़िल्म में ही बड़ी हिट साबित होती है। जैसा कि हम सब जानते हैं, कोई भी एक्टर को स्टार बनाता है, वह है डायरेक्टर। इस शो ने करण जौहर की तरह ही, दिखाया है कि डायरेक्टर कैसे सीधे हीरो की सफलता की कुंजी बनता है।
इसके बाद, कहानी में एक हीरोइन की एंट्री होती है, जो नेपोटिज़्म से बाहर निकलकर खुद को साबित करना चाहती है। उसके पिता अजय तलवार, जो पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री पर अपनी पकड़ रखते हैं, अपने स्टार की सफलता के लिए कोई भी जोखिम उठाने को तैयार हैं।
लेकिन असली ट्विस्ट तब आया जब आर्यन ख़ान ने अपने रियल लाइफ़ केस का इस्तेमाल करते हुए खुद का मज़ाक उड़ाया! उन्होंने बिना किसी फ़िल्टर के इंडस्ट्री की पॉलिटिक्स को पर्दे पर उतारा। मुझे लगता है कि यह शो इसीलिए हर किसी को पसंद नहीं आएगा—यह बहुत बोल्ड है।
“से नो टू ड्रग्स” जैसे संदेशों को बड़े-बड़े अक्षरों में दिखाना, वह भी पहले एपिसोड में, यह दिखाता है कि लड़के में गट्स हैं! वह मुंह से नहीं, सिनेमा से लोगों को जवाब देता है।
सस्पेंस, ट्विस्ट और क्यों यह देखना ज़रूरी है
शो का सबसे बड़ा आकर्षण है सस्पेंस और अनएक्सेप्टेड ट्विस्ट्स। सात एपिसोड तक एक बड़ा ट्विस्ट छुपा रहा—यह अपने आप में एक मास्टरस्ट्रोक है। हालांकि, बड़े बजट के बावजूद ऐसे एक्टर्स को चुना गया जो ज़्यादा फ़ेमस नहीं हैं, और यह फ़ैसला समझदारी भरा था, क्योंकि इससे कहानी प्रिडिक्ट नहीं हो सकी।
मनोज सर का कैरेक्टर एकदम अनएक्सेप्टेड है—उनके संवाद और एक्शन शो में फनी और यादगार बन गए हैं। लक्ष्य वर्सेस राघव की कॉमेडी भी दर्शकों को खींच रही है।
अंतिम राय: शो में एक्शन और मारधाड़ के अलावा, मास्टरमाइंड विलेन की योजनाओं को खूबसूरती से दर्शाया गया है। यह कुछ अलग और हटके है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन जैसा मैंने पहले कहा, सबको पसंद नहीं आएगा। मेरे हिसाब से, इसे पांच में से लगभग 3 स्टार दिए जा सकते हैं। एडल्ट लैंग्वेज और सस्पेंस इसे कुछ दर्शकों के लिए चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं।
फ़िलहाल, दर्शक इसे अपने-अपने तरीक़े से एक्सपीरियंस कर रहे हैं। अगले सीज़न की संभावनाएं पूरी तरह खुली हुई हैं, और हम सभी इंतज़ार कर रहे हैं कि कहानी में और कौन-कौन से ट्विस्ट्स दिखाई देंगे। क्या आप इस नए ‘ड्रामा, पॉलिटिक्स और रियलिटी के मिश्रण’ को देखने के लिए तैयार हैं?












