मुंगेर। शिक्षा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मुंगेर में चल रही D.El.Ed. परीक्षा के दौरान एक उम्मीदवार की जगह उसका मामा ही एग्जाम देने पहुँच गया। लेकिन परीक्षा केंद्र पर लागू बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम के चलते उसकी यह साजिश नाकाम हो गई और अब वह सलाखों के पीछे जाने की कगार पर है।
यह घटना मंगलवार की है, जब मुंगेर जिले के आदर्श परीक्षा केंद्र पर डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (D.El.Ed.) परीक्षा आयोजित की जा रही थी। सेंटर अधीक्षक ने फर्जी परीक्षार्थी को रंगे हाथ धर दबोचा।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का पर्दाफाश
अरवल जिले के माणिकपुर निवासी मुकेश कुमार अपने भांजे, जहानाबाद के राकेश कुमार के बदले मुंगेर D.El.Ed. परीक्षा देने आया था। परीक्षा शुरू होने से पहले जब अनिवार्य बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया गया, तो सिस्टम ने केवल 40% फोटो मैच दिखाया।
बस, इसी से परीक्षा केंद्र अधीक्षक नितिन कुमार का माथा ठनका। उन्होंने तुरंत उस उम्मीदवार को अलग करके कड़ाई से पूछताछ की। शुरुआत में तो आरोपी गोलमोल जवाब देता रहा, लेकिन जब दबाव बढ़ा तो उसने आखिरकार कबूल कर लिया कि वह अपने भांजे की जगह परीक्षा देने आया है।
सेंटर अधीक्षक की मुस्तैदी से रुका बड़ा धोखा
केंद्र अधीक्षक नितिन कुमार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कोतवाली थाना पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर आरोपी को हिरासत में ले लिया और थाने ले गई।
कोतवाली थाना अध्यक्ष राजीव तिवारी ने बताया कि इस मामले में फर्जी परीक्षार्थी मुकेश और उसका भांजा राकेश (असली उम्मीदवार) दोनों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
D.El.Ed. परीक्षा का क्या है महत्व?
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित D.El.Ed. परीक्षा उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए जीवन-रेखा जैसी है, जो भविष्य में प्राथमिक शिक्षक बनना चाहते हैं। इसी कारण लाखों युवा हर साल इस परीक्षा में शामिल होते हैं। मगर, जब मुंगेर जैसे केंद्रों पर ऐसे फर्जी परीक्षार्थियों के मामले सामने आते हैं, तो यह पूरी शिक्षा व्यवस्था की पवित्रता पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर देता है।
सुरक्षा कवच बना बायोमेट्रिक सिस्टम
इस पूरे प्रकरण ने एक बात पूरी तरह से साबित कर दी है कि D.El.Ed. जैसे महत्वपूर्ण एग्जाम में बायोमेट्रिक सिस्टम कितना गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह तकनीक फोटो और फिंगरप्रिंट के मिलान से तुरंत यह पहचान लेती है कि अभ्यर्थी असली है या कोई धोखेबाज।
सेंटर अधीक्षक के मुताबिक, मंगलवार को पहली शिफ्ट में लगभग 375 परीक्षार्थियों का बायोमेट्रिक मैपिंग किया गया। आने वाले दिनों में यह संख्या 500 तक भी पहुँच सकती है।
आरोपी का लिखित कबूलनामा
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी मुकेश कुमार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह अपने भांजे राकेश कुमार के कहने पर ही एग्जाम देने आया था। केंद्र पर ही उससे लिखित बयान भी लिया गया, जिसके बाद उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
मेहनती छात्रों पर अन्याय
मुंगेर D.El.Ed. परीक्षा में हुई यह घटना दिखाती है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है। एक ओर मेहनती छात्र दिन-रात पढ़कर ईमानदारी से परीक्षा देते हैं, वहीं कुछ लोग शॉर्टकट अपनाकर पूरे सिस्टम को धोखा देने की फिराक में रहते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे गंभीर मामलों में न केवल फर्जी परीक्षार्थी पर, बल्कि असली उम्मीदवार पर भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि यह एक कड़ा संदेश बन सके।
आगे क्या करेगी पुलिस?
कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी मुकेश को गिरफ्तार कर लिया है और उसे न्यायालय में पेश करने की तैयारी चल रही है। साथ ही, असली परीक्षार्थी राकेश कुमार की भूमिका की भी गहनता से जाँच की जा रही है।
निष्कर्ष
मुंगेर D.El.Ed. परीक्षा में मामा-भांजे की यह करतूत सिर्फ एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक बड़ी खतरे की घंटी है। यदि ऐसे फर्जीवाड़ों पर समय रहते सख्ती से रोक नहीं लगी, तो यह न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था के लिए, बल्कि ईमानदारी से तैयारी कर रहे मेहनती छात्रों के भविष्य के लिए भी अत्यंत खतरनाक साबित होगा।












