ज़रा सोचिए… एक इंडस्ट्री जहाँ हर तरफ़ शोर है, तेज़ बीट्स हैं और अक्सर फूहड़ता का बोलबाला है। ऐसे माहौल में, कोई समस्तीपुर की लड़की खड़ी होती है और कहती है, “नहीं, मैं तो बस पारिवारिक गीत ही गाऊँगी।” यही हैं सोनम आर. यादव—वो आवाज़, जिसने दिखाया कि भोजपुरी केवल अश्लील नहीं है, यह संस्कारों की भाषा भी है।
आजकल, जब AI डिटेक्टर भी इंसानों के लिखने का अंदाज़ पहचानने की कोशिश कर रहे हैं, तो हमें लिखने में वह ‘दिल का टच’ डालना होगा जो मशीनें नहीं समझ सकतीं।
बचपन के ‘टैलेंट शो’ से मुंबई की रफ़्तार तक
सोनम का बचपन बिहार के गाँवों में बीता, जहाँ स्कूल के सालाना जलसों में उनकी आवाज़ सबकी पसंदीदा हुआ करती थी। उन्हें याद है, “जब मैं गाती थी और लोग तालियाँ बजाते थे, तो वह फीलिंग किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी।” यह शौक धीरे-धीरे उनके खून में बस गया।
मगर, पिता ने शुरू में ही उन्हें साफ़-साफ़ कह दिया, “देखो बेटी, यह रास्ता गुलाबों की सेज नहीं है। यहाँ सिर्फ़ मेहनत चलती है।” लेकिन असली कहानी यहाँ से शुरू होती है: उनके पिता ही उनकी सबसे बड़ी ढाल और गुरु बन गए। सोनम मानती हैं कि अगर पिता ने उस समय ‘हाँ’ नहीं कहा होता और बाद में बारीकियों से नहीं सिखाया होता, तो आज यह सफ़र अधूरा रह जाता। पिता का मन्त्र सीधा था: “धीमे चलो, मगर मज़बूत चलो।”
क्यों ‘विदाई गीत’ ही इनकी पहचान बने?
आज के दौर में जब सब तेज़ और चटपटा गाना चाहते हैं, सोनम जानती थीं कि उन्हें क्या नहीं करना है। उनका कहना सीधा है: “मैं कल को अपने माता-पिता या परिवार के सामने शर्मिंदा नहीं होना चाहती। मुझे वो आशीर्वाद चाहिए जो आप अपनी माँ या बेटी के साथ बैठकर मेरा गाना सुनकर दें।”
और बस, यही वजह है कि सोनम के विवाह और विदाई गीत इतने हिट होते हैं। उनके विदाई गीत सुनकर तो लोगों के कलेजे में हूक उठ जाती है—आँखों में पानी आ ही जाता है। उनकी गायकी में एक मासूमियत है जो सीधे दिल से बात करती है।
इंडस्ट्री का सच: ‘अच्छे लोग बचा रहे हैं भोजपुरी’
भोजपुरी पर जब अश्लीलता का ‘टैग’ लगता है, तो सोनम निराश नहीं होतीं। उनका नज़रिया बहुत सुलझा हुआ है: “इंडस्ट्री ख़राब नहीं है। कुछ लोग अपने फ़ायदे के लिए इसे ख़राब कर रहे हैं। हमें उन्हें ‘ना’ कहना सीखना होगा।”
पवन सिंह और खेसारी लाल यादव पर उनका जवाब भी उनकी साफ़गोई दिखाता है। उन्होंने कहा, “अरे, दोनों अपनी जगह किंग हैं। एक की गायकी दमदार है, तो दूसरे का परफ़ॉर्म करने का स्टाइल ज़बरदस्त। किसी को कम क्यों आँकना?”
40 मिलियन व्यूज़: साफ़-सुथरी कामयाबी का सबूत
आज सोनम का यूट्यूब चैनल ‘Sonam R Yadav Official’ सिर्फ़ एक चैनल नहीं है, यह इस बात का खुला सबूत है कि दर्शकों को अच्छी चीज़ें भी चाहिए। उनका विदाई गीत ‘बचपन से पोसी पापा हो…’ को 40 मिलियन से ज़्यादा बार देखा गया है! यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है।
समस्तीपुर की इस लड़की ने मुंबई जाकर ‘तेजस सर’ से संगीत सीखा और अपनी आवाज़ को तराशा। आज वह न सिर्फ़ भोजपुरी बल्कि मैथिली, हिंदी और अंगिका में भी गाती हैं—एक ऑल-राउंडर!
सोनम आर. यादव महज़ एक सिंगर नहीं हैं। वह एक उम्मीद हैं। एक संदेश हैं कि भोजपुरी संगीत को भी सम्मान की नज़र से देखा जा सकता है, बशर्ते हम साफ़-सुथरा गाने का फैसला करें।
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